ISRO Mission 2026 होगा ऐतिहासिक! गगनयान और PSLV-C62 को लेकर बड़ी घोषणा संभव, अंतरिक्ष में भारत की नई छलांग
साल 2026 की शुरुआत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रही है। हालिया रिपोर्ट्स और इसरो से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आने वाले एक-दो दिनों में इसरो अपने दो सबसे महत्वाकांक्षी मिशनों—गगनयान (Gaganyaan) और PSLV-C62—को लेकर बड़ी घोषणा कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ देगा।
इन मिशनों के जरिए भारत न सिर्फ मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा, बल्कि रणनीतिक उपग्रहों और निजी भागीदारी के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छुएगा।
गगनयान मिशन: भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी
गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम है, जिसका सपना देश ने दशकों पहले देखा था। इसरो प्रमुख के अनुसार, मार्च 2026 तक भारत कुल सात अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने की योजना पर काम कर रहा है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण Gaganyaan G1 मिशन है।
यह मिशन पूरी तरह मानवरहित (Uncrewed) होगा, लेकिन इसे मानव अंतरिक्ष उड़ान की अंतिम तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

‘व्योममित्र’: अंतरिक्ष में जाने वाली भारत की पहली महिला रोबोट
गगनयान G1 मिशन की सबसे खास बात है इसमें भेजी जाने वाली ‘व्योममित्र’ (Vyommitra)। यह एक उन्नत ह्यूमनॉइड रोबोट है, जिसे इसरो ने खासतौर पर मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए विकसित किया है।
व्योममित्र क्या करेगी?
-
अंतरिक्ष यान के अंदर मानव जैसी गतिविधियों का सिमुलेशन
-
लाइफ सपोर्ट सिस्टम की निगरानी
-
कंट्रोल पैनल को ऑपरेट करना
-
आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया देना
-
डेटा को पृथ्वी पर भेजना
इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री (गगनयात्री) अंतरिक्ष में जाएं, तो उनकी सुरक्षा में कोई कमी न रहे।
गगनयान G1 मिशन का उद्देश्य क्या है?
इस मिशन के ज़रिए इसरो कई अहम तकनीकों का परीक्षण करेगा:
-
लाइफ सपोर्ट सिस्टम (ऑक्सीजन, तापमान, दबाव)
-
क्रू एस्केप सिस्टम (आपात स्थिति में बचाव)
-
री-एंट्री टेक्नोलॉजी (वायुमंडल में सुरक्षित वापसी)
-
संचार और नेविगेशन सिस्टम
इन सभी परीक्षणों के सफल होने के बाद ही 2027 में भारत अपने पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन को लॉन्च करेगा।
LVM3: मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए खास रॉकेट
गगनयान मिशन को लॉन्च करने के लिए इसरो अपने भरोसेमंद और शक्तिशाली LVM3 (पहले Gaganyaan Launch Vehicle / GSLV Mk-III) रॉकेट का उपयोग करेगा। इसे खासतौर पर Human Rated बनाया गया है, यानी यह मानव जीवन की सुरक्षा के उच्चतम मानकों पर खरा उतरता है।
PSLV-C62: 2026 की पहली उड़ान?
2026 की शुरुआत इसरो के लिए PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन से होने की पूरी संभावना है।
संभावित लॉन्च डेट
-
10 जनवरी 2026
-
स्थान: श्रीहरिकोटा (सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र)
मिशन का उद्देश्य
इस मिशन के तहत EOS-N1 (Earth Observation Satellite) को कक्षा में स्थापित किया जाएगा। यह उपग्रह मुख्य रूप से:
-
सीमा निगरानी
-
आपदा प्रबंधन
-
रणनीतिक और रक्षा उद्देश्यों
के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसे DRDO के सहयोग से विकसित किया गया है।
निजी भागीदारी की नई शुरुआत: HAL और L&T का योगदान
साल 2026 भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण के लिहाज़ से भी ऐतिहासिक होगा। पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब:
-
HAL (Hindustan Aeronautics Limited)
-
L&T (Larsen & Toubro)
द्वारा पूरी तरह निर्मित PSLV रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा। यह कदम भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और निजी कंपनियों को वैश्विक स्पेस मार्केट में उतारने की दिशा में बड़ा संकेत है।
2026 में ISRO के प्रमुख मिशन: एक नजर में
| मिशन का नाम | संभावित समय | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| PSLV-C62 | जनवरी 2026 | EOS-N1 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट |
| PSLV-N1 | फरवरी 2026 | निजी कंसोर्टियम द्वारा निर्मित पहला PSLV |
| Gaganyaan G1 | मार्च 2026 तक | मानवरहित मिशन (व्योममित्र के साथ) |
| SSLV L1 | मार्च 2026 तक | छोटे उपग्रहों के लिए समर्पित मिशन |
SSLV: छोटे उपग्रहों के बाजार में भारत की बड़ी छलांग
इसरो का SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) प्रोग्राम भारत को छोटे उपग्रहों के तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति दिलाने वाला है। यह स्टार्टअप्स, निजी कंपनियों और विदेशी ग्राहकों के लिए एक किफायती और तेज़ विकल्प साबित होगा।
निष्कर्ष: अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की ओर भारत
साल 2026 इसरो के लिए केवल मिशनों का साल नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता, मानव अंतरिक्ष उड़ान और निजी भागीदारी का प्रतीक बनने जा रहा है। गगनयान मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर देगा, जिन्होंने अपने दम पर मानव को अंतरिक्ष में भेजा है।
आने वाले दिनों में इसरो की होने वाली घोषणा निस्संदेह भारत को अंतरिक्ष की महाशक्ति बनाने की दिशा में एक और मजबूत कदम होगी।