🕊️ एक युग का अंत: वरिष्ठ नेता शिवराज पाटिल का निधन—भारत ने खो दिया एक दिलेर राजनेता
भारत के राजनीतिक इतिहास के एक लंबे और सम्मानित अध्याय के लेखक, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शिवराज वी. पाटिल का निधन शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025 की सुबह उनके निवास स्थान लातूर, महाराष्ट्र में हो गया। वे 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से वे स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।
उनके जाने से भारतीय राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं को एक अनुभवी, प्रतिष्ठित और ईमानदार नेता खोना पड़ा, जिनकी राजनीतिक यात्रा महाराष्ट्र की जमीं से देश के सर्वोच्च राजनीतिक मंच तक फैली हुई थी।
📍 लातूर से दिल्ली तक: एक प्रेरणादायक राजनीतिक सफर
शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को महाराष्ट्र के लातूर जिले के चाकुर गांव में हुआ था। उन्होंने स्थानीय राजनीति से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की, जो बाद में राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच गया।
उनके करियर के कुछ मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं:
- 🏛️ लोकसभा सांसद: 1980 में पहली बार लातूर से सांसद चुने गए और कई बार इस सीट से विजय प्राप्त की।
- 🗣️ लोकसभा अध्यक्ष: 1991 से 1996 तक भारत के 10वें स्पीकर ऑफ़ लोक सभा के रूप में सेवा दी।
- 🛡️ केंद्रीय गृह मंत्री: 2004 से 2008 तक भारत के गृह मंत्री रहे—एक अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण पद।
- 🏛️ राज्यपाल: 2010 से 2015 तक उन्होंने पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में भी देश की सेवा की।
इन सभी पदों पर रहते हुए उन्होंने लोकसभा की गरिमा बनाए रखी और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा तथा ज्ञान का प्रतिमान स्थापित किया।
🕯️ 26/11 के बाद नैतिक जिम्मेदारी
एक उल्लेखनीय तथ्य यह है कि 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद, तत्कालीन गृह मंत्री पाटिल ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था। यह निर्णय उनकी नैतिकता और जिम्मेदारी की भावना का द्योतक था।
उनका यह कदम राजनीतिक जीवन में विरले ही देखने को मिलता है और आज भी इसे ईमानदारी और संवैधानिक संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
👨👩👧 परिवार और जीवन
शिवराज पाटिल अपने पीछे बेटे शैलेश पाटिल, पुत्रवधू अर्चना पाटिल (जो राजनीति में सक्रिय हैं) और दो पोतियों को छोड़ गए हैं।
जीवन भर उन्होंने एक आदर्श विचार के साथ राजनीति की—जहाँ कर्म, मर्यादा और लोक-हित सर्वोपरि हो।
🧡 नेताओं और देश ने दी अंतिम श्रद्धांजलि
उनके निधन पर कई वरिष्ठ राजनेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों और विपक्ष के नेताओं ने उन्हें एक “समर्पित, विद्वान और मर्यादित राजनेता” बताया है, जिन्होंने लोकतंत्र के सिद्धांतों का सम्मान किया और पारदर्शिता, गरिमा तथा नैतिकता के साथ काम किया।
शिवराज पाटिल का निधन न केवल एक राजनीतिक हस्ती के लिए घाटा है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के लिए भी एक दुर्लभ और काबिल राजनीतिज्ञ के चले जाने का दुःख है।
🌿 समापन विचार
शिवराज पाटिल ने जीवन के अंतिम क्षण तक देश-सेवा के उन सिद्धांतों को अपनाये रखा, जिनसे वे हमेशा जुड़े रहे। उनका जीवन और किरदार आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत रहेगा—एक ऐसा उदाहरण जहाँ राजनीति सिर्फ़ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जवाबदेही, नैतिकता और जनहित का पवित्र कार्य था।
ओम शांति।